बस जलाने के मामले में NIA कोर्ट का एक्शन, 17 साल बाद सुनाया अहम फैसला

केरल के एर्नाकुल में 17 वर्ष पुराने मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए की स्पेशल अदालत ने अहम फैसला सुनाया है।

ये मामले कलामासेरी बस जलाने का है। इस केस में कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है।

ये घटना 2005 की है। करीब 17 साल बाद इस मामले में फैसला आया है।

हालांकि दोषियों को सजा का ऐलान अभी नहीं किया गया है। कोर्ट इस मामले में 1 अगस्त को सजा सुनाएगी।

एर्नाकुलम और सलेम के बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल नसर मदनी की रिहाई की मांग के समर्थन में यह घटना हुई थी, जिन्हें 2005 में कोयंबटूर जेल में हिरासत में लिया गया था।

आरोपी व्यक्तियों ने सितंबर 2005 के पहले सप्ताह में युद्ध छेड़ने, हमला कर आतंक फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

उन्होंने मदनी के निरंतर हिरासत के प्रतिशोध में एक आपराधिक साजिश भी रची थी।

एर्नाकुलम में तीनों आरोपी 8 सितंबर, 2005 को अलुवा मस्जिद में एकत्र हुए थे।

एर्नाकुलम में तीनों आरोपी 8 सितंबर, 2005 को अलुवा मस्जिद में एकत्र हुए थे।

इसके बाद तमिलनाडु सरकार के स्वामित्व वाली एक बस में आग लगाने के लिए आरोपी माजिद परंबाई और सूफिया के कहने और उकसाने पर इन्होंने अपनी योजना बनाई थी।

इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने करीब पांच साल की जांच के आधार पर वर्ष 2010 में 13 आरोपियों के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल की थी।

कलामासेरी बस जलाने के मामले में कोर्ट ने वर्ष 2022 में तीनों आरोपियों- नजीर थडियंतविदाथा, साबिर बुहारी और थजुदीन को आईपीसी की धारा 16(1)(बी) की धारा 120बी, 121ए और यूए (पी) अधिनियम की धारा 18 के तहत दोषी ठहराया गया है।