विशेषज्ञों की चेतावनी: बच्चों में भी हो सकता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, इन जोखिम कारकों को लेकर बरतें सावधानी

डॉक्टर्स कहते हैं कि आमतौर पर टाइप-1 डायबिटीज का खतरा बच्चों में देखा जाता रहा है

हालांकि कुछ जोखिम कारक पांच साल से भी कम उम्र के बच्चों में  टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा देते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर बच्चों में डायबिटीज के खतरे को लेकर ध्यान नहीं दिया जाता है, पर यह आगे चलकर कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकती है।

विशेषकर अगर आपके बच्चों को डायबिटीज की समस्या है और समय पर इसका निदान नहीं हो पाता है तो यह शरीर में किडनी-लिवर सहित कई अन्य अंगों के लिए समस्याएं बढ़ा सकता है।

आंकड़े बताते हैं कि शहरी परिवेश में पल रहे बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम अधिक देखा गया है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन माता-पिता को डायबिटीज का समस्या रही है उन्हें अपने बच्चों में इसके जोखिमों को लेकर विशेष सतर्कता बरतती रहनी चाहिए।

कोविड के इस दौर ने जिस तरह से युवा से लेकर बच्चों तक को सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का आदी बना दिया है, इसके कारण डायबिटीज के मामले और भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन बच्चों में डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री रही है, यानी कि अगर माता-पिता में से किसी को डायबिटीज रहा है तो बच्चों में भी इसका खतरा हो सकता है।

इसके अलावा यदि बच्चे का बॉडी मास इंडेक्स अधिक है या वह मोटापे का शिकार है तो डायबिटीज होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

बच्चों में मोटापे की समस्या को डायबिटीज के साथ हृदय रोग और अन्य कई बीमारियों का कारण माना जाता है।

बच्चों से लेकर वयस्कों तक इन्हें डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर जाना जाता है।